आपको हमारी वेबसाइट पर हर प्रकार की तकनीकी जानकारी मिलेगी और आप सब हमसे इस वेबसाइट की मदद से कोई भी तकनीकी जानकारी पूछ सकते है|||

मेरे कलम से लिखी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 26 जनवरी 2016

26 जनवरी की हार्दिक शुभकामना आप सब को

3 टिप्‍पणियां :
happy-republic-day-www.computerguru.co.in
कंप्यूटर गुरु के सभी पाठको को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये 
 दोस्तों आज गणतंत्र दिवस है सब को पता होगा की आज के दिन हमारा संविधान लिखा गया था| आज के दिन के लिए हमने एक लेख लिखा है जो निचे लिखा हुआ है| अगर आपको यह लेख पसंद आया तो आप कमेंट जरुर कीजियेगा|

happy-republic-day-www.computerguru.co.in

                                                         लेख - गणतंत्र दिवस(कंप्यूटर गुरु के द्वारा)
मातृभुमि के सम्मान एवं उसकी आजादी के लिये असंख्य वीरों ने अपने जीवन की आहूति दी थी। देशभक्तों की गाथाओं से भारतीय इतिहास के पृष्ठ भरे हुए हैं। देशप्रेम की भावना से ओत-प्रोत हजारों की संख्या में भारत माता के वीर सपूतों ने, भारत को स्वतंत्रता दिलाने में अपना सर्वस्य न्योछावर कर दिया था। ऐसे ही महान देशभक्तों के त्याग और बलिदान के परिणाम स्वरूप हमारा देश, गणतान्त्रिक देश हो सका।
गणतन्त्र (गण+तंत्र) का अर्थ है, जनता के द्वारा जनता के लिये शासन। इस व्यवस्था को हम सभी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। वैसे तो भारत में सभी पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं, परन्तु गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। इस पर्व का महत्व इसलिये भी बढ जाता है क्योंकि इसे सभी जाति एवं वर्ग के लोग एक साथ मिलकर मनाते हैं।
गणतंत्र दिवस, 26 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं? मित्रों, जब अंग्रेज सरकार की मंशा भारत को एक स्वतंत्र उपनिवेश बनाने की नजर नही आ रही थी, तभी 26 जनवरी 1929 के लाहौर अधिवेशन में जवाहरलाल नेहरु जी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पूर्णस्वराज्य की शपथ ली। पूर्ण स्वराज के अभियान को पूरा करने के लिये सभी आंदोलन तेज कर दिये गये थे। सभी देशभकतों ने अपने-अपने तरीके से आजादी के लिये कमर कस ली थी। एकता में बल है, की भावना को चरितार्थ करती विचारधारा में अंग्रेजों को पिछे हटना पङा। अंतोगत्वा 1947 को भारत आजाद हुआ, तभी यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी 1929 की निर्णनायक तिथी को गणतंत्र दिवस के रूप में मनायेंगे।
26 जनवरी, 1950 भारतीय इतिहास में इसलिये भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि भारत का संविधान, इसी दिन अस्तित्व मे आया और भारत वास्तव में एक संप्रभु देश बना। भारत का संविधान लिखित एवं सबसे बङा संविधान है। संविधान निर्माण की प्रक्रिया में 2 वर्ष, 11 महिना, 18 दिन लगे थे। भारतीय संविधान के वास्तुकार, भारत रत्न से अलंकृत डॉ.भीमराव अम्बेडकर प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। भारतीय संविधान के निर्माताओं ने विश्व के अनेक संविधानों के अच्छे लक्षणों को अपने संविधान में आत्मसात करने का प्रयास किया है। इस दिन भारत एक सम्पूर्ण गणतान्त्रिक देश बन गया।देश को गौरवशाली गणतन्त्र राष्ट्र बनाने में जिन देशभक्तो ने अपना बलिदान दिया उन्हे याद करके, भावांजली देने का पर्व है, 26 जनवरी।
मित्रो, भारत से व्यपार का इरादा लेकर अंग्रेज भारत आये थे, लेकिन धीरे -धीरे उन्होने यहाँ के राजाओं और सामंतो पर अपनी कूटनीति चालों से अधिकार कर लिया। आजादी कि पहली आग मंगल पांडे ने 1857 में कोलकता के पास बैरकपुर में जलाई थी, किन्तु कुछ संचार संसाधनो की कमी से ये आग ज्वाला न बन सकी परन्तु, इस आग की चिंगारी कभी बुझी न थी। लक्ष्मीबाई से इंदिरागाँधी तक, मंगल पांडे से सुभाष तक, नाना साहेब से सरदार पटेल तक, लाल(लाला लाजपत राय), बाल(बाल गंगाधर तिलक), पाल(विपिन्द्र चन्द्र पाल) हों या गोपाल, गाँधी, नेहरु सभी के ह्रदय में धधक रही थी। 13 अप्रैल 1919 की (जलिया वाला बाग) घटना, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की सबसे अधिक दुखदाई घटना थी। जब जनरल डायर के नेतृत्व में अंग्रेजी फौज ने गोलियां चला के निहत्थे, शांत बूढ़ों, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों लोगों को मार डाला था और हज़ारों लोगों को घायल कर दिया था। यही वह घटना थी जिसने भगत सिंह और उधम सिंह जैसे, क्रांतीकारियों को जन्म दिया। अहिंसा के पुजारी हों या हिंसात्मक विचारक क्रान्तिकारी, सभी का ह्रदय आजादी की आग से जलने लगा। हर वर्ग भारतमात के चरणों में बलिदान देने को तत्पर था।
अतः 26 जनवरी को उन सभी देशभक्तों को श्रद्धा सुमन अपिर्त करते हुए, गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भारतवर्ष के कोने-कोने में बड़े उत्साह तथा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। प्रति वर्ष इस दिन प्रभात फेरियां निकाली जाती है। भारत की राजधानी दिल्ली समेत प्रत्येक राज्य तथा विदेषों के भारतीय राजदूतावासों में भी यह त्योहार उल्लास व गर्व से मनाया जाता है।
26 जनवरी का मुख्य समारोह भारत की राजधानी दिल्ली में भव्यता के साथ मनाते हैं। देश के विभिन्न भागों से असंख्य व्यक्ति इस समारोह की शोभा देखने के लिये आते हैं। हमारे सुरक्षा प्रहरी परेड निकाल कर, अपनी आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करते हैं तथा सुरक्षा में सक्षम हैं, इस बात का हमें विश्वास दिलाते हैं। परेड विजय चौक से प्रारम्भ होकर राजपथ एवं दिल्ली के अनेक क्षेत्रों से गुजरती हुयी लाल किले पर जाकर समाप्त हो जाती है। परेड शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री ‘अमर जवान ज्योति’ पर शहीदों को श्रंद्धांजलि अर्पित करते हैं। राष्ट्रपति अपने अंगरक्षकों के साथ 14 घोड़ों की बग्घी में बैठकर इंडिया गेट पर आते हैं, जहाँ प्रधानमंत्री उनका स्वागत करते हैं। राष्ट्रीय धुन के साथ ध्वजारोहण करते हैं, उन्हें 21 तोपों की सलामी दी जाती है, हवाई जहाजों द्वारा पुष्पवर्षा की जाती है। आकाश में तिरंगे गुब्बारे और सफेद कबूतर छोड़े जाते हैं। जल, थल, वायु तीनों सेनाओं की टुकडि़यां, बैंडो की धुनों पर मार्च करती हैं। पुलिस के जवान, विभिन्न प्रकार के अस्त्र-षस्त्रों, मिसाइलों, टैंको, वायुयानो आदि का प्रदर्षन करते हुए देश के राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। सैनिकों का सीना तानकर अपनी साफ-सुथरी वेषभूषा में कदम से कदम मिलाकर चलने का दृष्य बड़ा मनोहारी होता है। यह भव्य दृष्य को देखकर मन में राष्ट्र के प्रति भक्ति तथा ह्रदय में उत्साह का संचार होता है। स्कूल, कॉलेज की छात्र-छात्राएं, एन.सी.सी. की वेशभूषा में सुसज्जित कदम से कदम मिलाकर चलते हुए यह विश्वास उत्पन्न करते हैं कि हमारी दूसरी सुरक्षा पंक्ति अपने कर्तव्य से भलीभांति परिचित हैं। मिलेट्री तथा स्कूलों के अनेक बैंड सारे वातावरण को देशभक्ति तथा राष्ट्र-प्रेम की भावना से गुंजायमान करते हैं। विभिन्न राज्यों की झांकियां वहाँ के सांस्कृतिक जीवन, वेषभूषा, रीति-रिवाजों, औद्योगिक तथा सामाजिक क्षेत्र में आये परिवर्तनों का चित्र प्रस्तुत करती हैं। अनेकता में एकता का ये परिदृष्य अति प्रेरणादायी होता है। गणतन्त्र दिवस की संध्या पर राष्ट्रपति भवन, संसद भवन तथा अन्य सरकारी कार्यालयों पर रौशनी की जाती है।
26 जनवरी का पर्व देशभक्तों के त्याग, तपस्या और बलिदान की अमर कहानी समेटे हुए है। प्रत्येक भारतीय को अपने देश की आजादी प्यारी थी। भारत की भूमि पर पग-पग में उत्सर्ग और शौर्य का इतिहास अंकित है। किसी ने सच ही कहा है- “कण-कण में सोया शहीद, पत्थर-पत्थर इतिहास है।“ ऐसे ही अनेक देशभक्तों की शहादत का परिणाम है, हमारा गणतान्त्रिक देश भारत।
26 जनवरी का पावन पर्व आज भी हर दिल में राष्ट्रीय भावना की मशाल को प्रज्वलित कर रहा है। लहराता हुआ तिरंगा रोम-रोम में जोश का संचार कर रहा है, चहुँओर खुशियों की सौगात है। हम सब मिलकर उन सभी अमर बलिदानियों को अपनी भावांजली से नमन करें, वंदन करें।
                                                                                              जय हिन्द, जय भारत  


शुक्रवार, 1 जनवरी 2016

आया रे!आया रे! नया साल आ रे!इसके साथ ही अपनी इंग्लिश ब्लॉग आया रे!

कोई टिप्पणी नहीं :
Happy New Year 2016 - www.computerguru.co.in

केसे हो आप सब आज 1 जनवरी,2016 है और आज के दिन को सब न्यू इयर बोलते है| आज का दिन हर व्यक्ति के लिए खास होता है| अधिकतर लोग इस दिन प्लानिंग करते है की उन्हें इस पुरे साल क्या करना है| मेरे ख्याल से आप भी प्लानिंग कर रहे होंगे की आपको इस साल क्या-क्या करना है| हमने तो प्लानिंग कर लिया है की हम इस पुरे साल आपको कई तरह के टिप्स और ट्रिक्स देंगे| आप ने भी हमारी तरह की कोई ना कोई प्लानिंग जरुर किया होगा| आज के दिन हम अपनी साईट का इंग्लिश वर्शन को लॉन्च कर रहे है| ताकि जिन लोगो को हिंदी ठीक से नहीं अति वह हमारी पोस्ट इंग्लिश मे भी पढ़ पाए| लेकिन हम अपनी हिंदी साईट(Computer Guru) की पोस्टो को इंग्लिश साईट मे कॉपी नहीं करेंगे| हम अपनी इंग्लिश ब्लॉग मे अलग-अलग पोस्ट देंगे पर वह सब तकनीक से जुडी हुई होगी| अगर आपको हमारी इंग्लिश ब्लॉग पे जाना होगा तो आप सबसे पहले यहाँ क्लिक करे|
 मुझे व्हाटसप्प पर अलग-अलग हैप्पी न्यू इयर की विश आ रही है| मै आपको उनमे से एक अच्छी विश आपके सामने देने जा रहा है| वेसे मुझे सभी की विश पसंद आयी और मै उन सब का धन्यवाद करना चाहता हु जिन्होंने मुझे हैप्पी न्यू इयर की विश दी|
तो चलिए हम आपको वह व्हाटसप्प हैप्पी न्यू इयर विश देते है जो हमे सबसे अच्छा लगा वेसे तो हमें सभी विश अच्छे लगे|
इससे पहले की इस साल का अस्त हो,और कैलेंडर नष्ट हो;
आप ख़ुशी मे मस्त हो, मोबाइल नेटवर्क व्यस्त हो;
दुआ है नया साल आपके लिए जबरदस्त हो|
                             “हैप्पी न्यू इयर...!”
                                 {2016}

        

शुक्रवार, 4 सितंबर 2015

जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई हो! आपको

कोई टिप्पणी नहीं :
मेरे दोस्तों आपको जन्माष्टमी की बहुत बहुत बधाई हो आप सब को तो पता ही होगा की जन्माष्टमी भगवान कृष्ण के जन्मदिन पर मनाया जाता है सबसे पहले मै आपको भगवान कृष्ण के बारे मे कुछ महत्तवपूर्ण जानकारी बताता हु।
जय श्री कृष्ण यशोदा नंदन, देवकी पुत्र भारतीय समाज में कृष्ण के नाम से सदियों से पूजे जा रहे हैं। तार्किकता के धरातल पर कृष्ण एकऐसा एकांकी नायक हैं, जिसमें जीवन के सभी पक्ष विद्यमान है। कृष्ण वो किताब हैं जिससे हमें ऐसी कई शिक्षाएं मिलती हैं जो विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक सोच को कायम रखने की सीख देती हैं।कृष्ण के जन्म से पहले ही उनकी मृत्यु का षड्यंत्र रचा जानाऔर कारावास जैसे नकारात्मक परिवेश में जन्म होना किसी त्रासदी से कम नही था । परन्तु विपरीत वातावरण के बावजूद नंदलाला , वासुदेव के पुत्र ने जीवन की सभी विधाओं को बहुत ही उत्साह से जिवंत किया है। श्री कृष्ण की संर्पूण जीवन कथा कई रूपों में दिखाई पङती है।नटवरनागर श्री कृष्ण उस संर्पूणता के परिचायक हैं जिसमें मनुष्य, देवता, योगीराज तथा संत आदि सभी के गुणं समाहित है। समस्त शक्तियों के अधिपति युवा कृष्ण महाभारत में कर्म पर ही विश्वास करते हैं। कृष्ण का मानवीय रूप महाभारत काल में स्पष्ट दिखाई देता है। गोकुल का ग्वाला, बिरज का कान्हा धर्मकी रक्षा के लिए रिश्तों के मायाजाल से दूर मोह-माया के बंधनों से अलग है। कंस हो या कौरव पांडव, दोनो ही निकट के रिश्ते फिर भी कृष्ण ने इस बात का उदाहरण प्रस्तुत किया कि धर्म की रक्षा के लिए रिश्तों की बजाय कर्तव्य को महत्व देना आवश्यक है। ये कहना अतिश्योक्ति न होगी कि कर्म प्रधानगीता के उपदेशों को यदि हम व्यवहार में अपना लें तो हम सब की चेतना भी कृष्ण सम विकसित हो सकती है।कृष्ण का जीवन दो छोरों में बंधा है। एक ओर बांसुरी है, जिसमें सृजन का संगीत है, आनंद है, अमृत है और रास है। तो दूसरी ओर शंख है, जिसमें युद्ध की वेदना है, गरल है तथा निरसता है। ये विरोधाभास ये समझाते हैं कि सुख है तो दुःख भी है। यशोदा नंदन की कथा किसी द्वापर की कथा नही है, किसी ईश्वर का आख्यान नही है और ना ही किसी अवतार की लीला। वो तोयमुना के मैदान में बसने वाली भावात्मक रुह की पहचान है। यशोदा का नटखट लाल है तो कहीं द्रोपदी का रक्षक, गोपियों का मनमोहन तो कहीं सुदामा का मित्र। हर रिश्ते में रंगे कृष्ण का जीवन नवरस में समाया हुआ है।माखन चोर, नंदकिशोर के जन्म दिवस पर मटकी फोङ प्रतियोगिता काआयोजन, खेल-खेल में समझा जाता है कि किस तरह स्वयं को संतुलित रखते हुए लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है; क्योंकिसंतुलित और एकाग्रता का अभ्यास ही सुखमय जीवन का आधार है। सृजन के अधिपति, चक्रधारी मधुसूदन का जन्मदिवस उत्सव के रूप में मनाकर हम सभी में उत्साह का संचार होता है और जीवन के प्रति सृजन का नजरिया जीवन को खुशनुमा बना देता है “श्रीकृष्ण जिनका नाम है,गोकुल जिनका धाम है!ऐसे श्री भगवान कोबारम्बार प्रणाम है।” मेरे दोस्तों अब तो आप को भगवान श्री कृष्ण जी की कहानी पता चल गी होगी मेरे दोस्तों अगर आपको भगवान कृष्ण के बढ़िया बढ़िया वॉलपेपर डाउनलोड करने है तो सबसे पहले यहाँ क्लिक करे

शनिवार, 29 अगस्त 2015

बधाई हो! आपको राखी की

कोई टिप्पणी नहीं :
मेरे भाईओ बहनों आपको रक्षा बंधन की बहुत बहुत बधाई हो आज बहने अपने भाईयो को राखी बांधेगे लेकिन अभी भी कुछ भाईये अपने बहन से दूर है और वह अपने बहन को कोई गिफ्ट नहीं दे सकते पर मै आपके लिए एक एसी वेबसाइट लाया हु जिससे आप अपने बहन को कोई भी गिफ्ट दे सकते है चाये आपकी बहन किसी भी देश या राज्य मे हो अगर आपको वह वेबसाइट खोलना है और अपनी बहन को कोई गिफ्ट करना है तो सबसे पहले यहाँ क्लिक करे
आपको राखी की बहुत बहुत बधाई हो